एक एहन पावन धाम, जतय प्राचीन आस्था आ आधुनिक आध्यात्मिक अनुभूति केर अद्भुत संगम अछि।
एहि विरासतपूर्ण मंदिरक परंपरा संग, माँ दुर्गाक शाश्वत कृपा एवं दिव्य शक्तिक साक्षात् अनुभव करू।
बाल्यावस्था में मातृक सँ स्नेह प्रायः सभ नैना-भुटका केँ रहैत छैक। से हमरो दूनू भाँई - स्वयं निरंजन (बाल मुकुन्द) एवं हमर अनुज चि. रमेश (नीलाम्बर) - के रहल। मातृक में पर्याप्त स्नेह, स्वतन्त्रता आ सहज अपनापन भेटैत छल, जाहि कारणेँ प्रत्येक वर्ष जाड़ मास में, अपन पूo माँ केर सँग महीनाथपुर आबैत छलहुँ।
छेटगर भेलोपरान्त, जखन हम सभ उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षारत छलहुँ, तखन प्रथम बेर श्री दुर्गा जीक पूजा समय में उपस्थित हएबाक सुअवसर प्राप्त भेल। बाल्यकाल सँ पिताश्री (स्व. पं० बलदेव चौधरी) द्वारा सिखायल कवि विद्यापति रचित माँ दुर्गा जीक प्रार्थना "कनक भूधर शिखर वासिनि, चन्द्रिका चय चारु हासिनि…" ओतय भगवतीक समक्ष सादर प्रस्तुत कयलहुँ आ खूब आशीर्वाद प्राप्त भेल।
ई सभ माँ दुर्गे केर कृपा सँ सम्भव भेल। तत्पश्चात् श्री दुर्गा पूजाक समय में अपन उपस्थिति निरन्तर होमय लागल। एहि स्थल पर विधिवत, सविधि पूजा होइत अछि, आ एखनहु ई पूजा स्थल सिद्ध स्थल के रूप में विख्यात अछि - मान्यता अछि जे ओतय पहुँचैतहि अनेक प्रकारक विघ्न-बाधा दूर भऽ जाइत अछि।
खाताधारी - सतीश कुमार झा
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